गज के फंद छोडायो नाथ कइसे -२
हाँ....... हसि पूछै रे हसि पूछै हसि पूछै जनकपुर जाई
नाथ कैसे गज.......
गज को प्यास लगी कजरी बन गज यमुना को धायो।
गज की प्यास बुझन नहि पायो ग्राह ने फंद चलायो।।
नाथ कैसे गज.......
गज औ ग्राह लड़ै जल भीतर गज डूबन नहि पायो।
गज की टेर सुनी रघुनन्दन पाय पयादे धायो।।
नाथ कैसे गज.......
सबरी के बैर सुदामा के तंदुल रूचि रूचि भोग लगायो।
दुर्योधन घर मेवा त्याग्यो साग बिदुर घर खायो।।
नाथ कैसे गज.......
रावण मारेव अहिरावण मारेव मथुरा कंस पछारेव।
हिरण्यकुश के उदर बिदारेव प्रह्लादै जाय उबारेव।।
नाथ कैसे गज.......
राम सिया की होत भावँरी सखियाँ मंगल गायो।
तुलसीदास भज्यो भगवाना सिया राम वर पायो।।
नाथ कैसे गज.......
निर्देशक : राजेंद्र बहादुर सिंह , राजेंद्र सिंह (विषधर)
प्रकाशक -शरद सिंह
Bahut hi sundar
जवाब देंहटाएंDhanyvaad 🙏
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