हो भयो द्वारिका वासी अब हरि -2
हाँ..... हो भयो द्वारिकावासी -2
अब हरि भयो......
माघ उतरि गे फागुन लागे वृक्ष माँ झरि गई पाती।
हे वैसे श्याम बिनु सेज सूनि है जैसे दिया बिनु बाती।।
अब हरि भयो......
हे रोय रोय राधा विकल भई है प्राण भये अब घाती।
हे रोय रोय नैन बहै रतनारी वज़्र भई है छाती।।
अब हरि भयो......
हे मथुरा माँ हरि जनम लियो है गोकुल भूमि कहाती।
हे कुबरी का लैके निकरि गयो है गउवैं मरै पियासी।।
अब हरि भयो......
उद्धव आवै योग सिखावै लिखि लिखि पठवै पाती।
हे सूर श्याम बलि जाऊ चरण ते पाती नहीं सोहाती।।
अब हरि भयो......
निर्देशक ; श्री राजेंद्र बहादुर सिंह ,श्री राजेंद्र सिंह (विषधर )
लेखक; शरद सिंह
हाँ..... हो भयो द्वारिकावासी -2
अब हरि भयो......
माघ उतरि गे फागुन लागे वृक्ष माँ झरि गई पाती।
हे वैसे श्याम बिनु सेज सूनि है जैसे दिया बिनु बाती।।
अब हरि भयो......
हे रोय रोय राधा विकल भई है प्राण भये अब घाती।
हे रोय रोय नैन बहै रतनारी वज़्र भई है छाती।।
अब हरि भयो......
हे मथुरा माँ हरि जनम लियो है गोकुल भूमि कहाती।
हे कुबरी का लैके निकरि गयो है गउवैं मरै पियासी।।
अब हरि भयो......
उद्धव आवै योग सिखावै लिखि लिखि पठवै पाती।
हे सूर श्याम बलि जाऊ चरण ते पाती नहीं सोहाती।।
अब हरि भयो......
निर्देशक ; श्री राजेंद्र बहादुर सिंह ,श्री राजेंद्र सिंह (विषधर )
लेखक; शरद सिंह