बरखा बूँद गिनो गोइयाँ -2
सुधि लागि रे सुधि लागी सुधि लागि रही मधुबन मइहाँ
बरखा के बूँद......
जेठ तपै दिन रात असढ़वा उमड़ि घुमड़ि बरसेव गोइयाँ ,
जब सावन परे हिंडोर कृष्ण कुवरी संग खेलि रहयो गोइयाँ।
बरखा के बूँद......
भादौ रैन उमड़ि जल बरसै क्वार मा मोरीला कुहुकि रह्यो गोइयाँ,
जब कातिक परत उजियार चंद्र की तारा छिटिकि रह्यो गोइयाँ।
बरखा के बूँद......
अगहन अगम अंदेश पूस माँ हरि के वृत्त रह्यो गोइयाँ ,
माहै मकर नहाय पिया सँग खेलि रह्यो गोइयाँ।
बरखा के बूँद......
फागुन उड़त गुलाल चैत बन टेसू फूलि रह्यो गोइयाँ ,
सूर श्याम बैसाखै मोहन बहियाँ गहि गोइयाँ।
बरखा के बूँद......
निर्देशक ; श्री राजेंद्र बहादुर सिंह ,श्री राजेंद्र सिंह (विषधर )
लेखक; शरद सिंह
लेखक; शरद सिंह
