गोपाल गलिन मा गावै सखी-2
हाँ..... हो गावै बेनु बजावै -2
सखी गोपाल........
गावत गावत उहाँ गये जहँ परी सांकरी गैल।
जाय न पावै नंद दुलारे धरि लावो रे धरिलावो
धरि लावो सबै मिलि घेरि।।
सखी गोपाल........
जितनी सिटकी भुई मा परी है उतने गढ़ा कुम्हार।
उतने रावन होई गयो गढ़ लंका रे गढ लंका
गढ़ लंका के दरबार।।
सखी गोपाल........
सब कांवरियन कवर उठायो होइगे काधो कीच।
राधा गोरी बिछुल परी है धरि लावो रे धरि लावो
धरि लावो हमरी ओर।।
सखी गोपाल........
राधा एक अंजन बनवायो नौ अंगुरी दस पोर।
अंजन लोना परम सलोना हरि चितवो रे हरि चितवो
हरि चितवो हमरी ओर।।
सखी गोपाल........
निर्देशक : राजेंद्र बहादुर सिंह , राजेंद्र सिंह (विषधर)
प्रकाशक -शरद सिंह